Monday, August 30, 2010

Kesari Nandan


जय हनुमान ज्ञान गुण सागर । जय कपीस तिहुं लोग उजागर ।।

रामदूत अतुलित बल धामा । अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ।।

महावीर विक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ।।

कंचन बरन विराज सुवेसा । कानन कुण्डल कुंचित केसा ।।

हाथ वज्र औ ध्वजा विराजै । कांधे मूंज जनेऊ साजै ।।

शंकर सुवन केसरी नन्दन । तेज प्रताप महा जगवन्दन ।।

विघावान गुणी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ।।